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Showing posts from July, 2021

प्राचीन सभ्यताऐं (Rajasthan ancient civilizations)

Rajasthan ancient civilizations कालीबंगा सभ्यता जिला - हनुमानगढ़ नदी - सरस्वती(वर्तमान की घग्घर) समय - 3000 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक काल - कास्य युगीन काल खोजकर्ता - 1952 अमलानन्द घोस उत्खनन कर्ता - (1961-69) बी. बी. लाल, वी. के. थापर बी. बी. लाल - बृजबासी लाल बी. के. थापर - बालकृष्ण थापर शाब्दीक अर्थ - काली चुडि़यां विशेषताएं दोहरे जुते हुऐ खेत के साक्ष्य यह नगर दो भागों में विभाजित है और दोनों भाग सुरक्षा दिवार(परकोटा) से घिरे हुए हैं। अलंकृत ईटों, अलंकृत फर्श के साक्ष्य प्राप्त हुए है। लकड़ी से बनी नाली के साक्ष्य प्राप्त हुए है। यहां से ईटों से निर्मित चबुतरे पर सात अग्नि कुण्ड प्राप्त हुए है जिसमें राख एवम् पशुओं की हड्डियां प्राप्त हुई है।यहां से ऊंट की हड्डियां प्राप्त हुई है, ऊंट इनका पालतु पशु है। यहां से सुती वस्त्र में लिपटा हुआ ‘उस्तरा‘ प्राप्त हुआ है। यहां से कपास की खेती के साक्ष्य प्राप्त हुए है। जले हुए चावल के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। युगल समाधी के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यहां से मिट्टी से निर्मिट स्केल(फुटा) प्राप्त हुआ है। यहां से शल्य चिकित्सा के साक्ष्य प्रा...

Group of Ministers meeting regarding opening of educational institutions

 *शिक्षण संस्थान खोलने के संबंध में मंत्री समूह की बैठक*  _उच्च शिक्षा संस्थानों में कक्षाएं प्रारंभ करने का निर्णय 15 दिन बाद लिया जाएगा_ जयपुर, 24 जुलाई। प्रदेश में शिक्षण संस्थाओं को खोलने की तिथि और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित करने के संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा गठित मंत्री समूह की बैठक शनिवार सायं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा के राजकीय आवास पर आयोजित की गई।  बैठक में शिक्षा मंत्री श्री गोविंद सिंह डोटासरा, कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री भंवरसिंह भाटी शामिल हुए। तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने भरतपुर से दूरभाष द्वारा अपने विचार व्यक्त किए। इस बैठक में राज्य में शिक्षण संस्थाओं को खोलने के संबंध में विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।    उच्च शिक्षा के संबंध में हुई चर्चा के अनुसार इस समय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं चल रही हैं। उच्च माध्यमिक कक्षाओं के परिणाम घोषित होने के बाद अब ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। इसे दृष्टिगत रखते हुए उच्च शिक्षा संस्थानों में ...

Weekly Current Affairs

╔══════════════════════╗  🎯 Daily Current Affairs 2021 ╚══════════════════════╝ Q.1. Which country has abolished the requirement of male guardian for women participating in Haj? Ans. Saudi Arab Q.2. Which country's government has released an online hub for victims of ransomware attacks? Ans. America Q.3. At what age has Gira Sarabhai, the co-founder of the National Institute of Design in Ahmedabad passed away? Ans. 97 years Q.4. Which day is celebrated all over the world on 18th July? Ans. International Nelson Mandela Day Q.5. A Memorandum of Understanding has been signed between ITRA and which state government under the Ministry of AYUSH? Ans. Gujarat Government Q.6. With whom has the National Commission for Women signed an MoU to sensitize police personnel to gender equality? Ans. Bureau of Police Research & Development Q.7. How much rupees has been released by the Finance Ministry as GST compensation to the states and union territories? Ans. Rs 75,000 crore Q.8. What is the...

UPSC CDS RESULT 2019: रिजल्ट हुआ जारी

 *🔴UPSC CDS RESULT 2019: रिजल्ट हुआ जारी*   *सुरेश चंद्र बनें टॉपर* ................................................. *नई दिल्ली* *यूनियन पब्लिक  सर्वीस कमीशन के कंबाइंड सर्वीस ।। का रिजल्ट जारी कर दिया हैं.* यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने  कंबाइंड डिफेंस सर्विस 2019, CDS II परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है.  जिन उम्मीदवारों ने ये परीक्षा दी है वह आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. परीक्षा में सुरेश चंद्र ने पहला स्थान हासिल किया है. वहीं प्रवेश कुमार ने दूसरा और जतिन गर्ग ने तीसरा स्थान हासिल किया है. यूपीएससी की ओर से आयोजित  कंबाइंड डिफेंस सर्विस 2019, CDS II और SSB इंटरव्यू  के बाद 196 उम्मीदवारों ने इस परीक्षा को पास किया है. ये परीक्षा 149वीं (DE) कोर्स आफ इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून, इंडियन नेवल एकेडमी एझिमाला केरल और एयर फोर्स एकेडमी हैदराबाद प्री फ्लाइंग ट्रेनिंग कोर्स में दाखिले के लिए आयोजित हुई थी. *ऐसे देखें - UPSC CDS (I) 2019 रिजल्ट* स्टेप-1: यूपीएससी की वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं स्टेप-2: चेक ...

राजस्थान की नदियां(आंतरिक प्रवाह तंत्र की नदियां)

  राजस्थान की नदियां(आंतरिक प्रवाह तंत्र की नदियां) वे नदियों जिनका जल समुद्र तक नहीं पहुँच पाता है, अपने प्रवाह क्षेत्र मे ही विलुप्त हो जाती है, उन्हें आन्तरिक प्रवाह की नदियां कहते है घग्घर नदी उपनाम: सरस्वती, दृषद्धती, मृतनदी, नट नदी उद्गम: शिवालिका श्रेणी कालका (हिमांचल-प्रदेश) कुल ल. : 465 कि.मी. कालीबंगा सभ्यता का विकास राजस्थान की आन्तरिक प्रवाह की सर्वाधिक लम्बी नदी घग्घर नदी उद्गम हिमांचल प्रदेश में कालका के निकट शिवालिका की पहाडि़यों से होता है। यह नदी पंजाब व हरियाणा में बहकर हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी नामक स्थान पर प्रवेश करती है और भटनेर दुर्ग के पास जाकर समाप्त हो जाती है। किन्तु कभी-2 अत्यधिक वर्षा होने की स्थिति में यह नदी गंगानगर जिले में प्रवेश करती है और सुरतगढ़ अनुपगढ़ में बहती हुई पाकिस्तान के बहावलपुर जिले(प्रवेश बिन्दू बिजौर) में प्रवेश करती है। और अन्त में फोर्ट अब्बास नामक स्थान पर समाप्त हो जाती है। पाकिस्तान में इस नदी को "हकरा" (फारसी भाषा का शब्द) के नाम से जानी जाती है। थार के रेगिस्तान को पाकिस्तान में बोलिस्तान कहते है। इस नदी की कुल लम्बाई 465 ...

राजस्थान की नदियां(अरब सागर तंत्र की नदियां)

  राजस्थान की नदियां(अरब सागर तंत्र की नदियां) लूनी नदी उपनाम:- लवणवती, सागरमती/मरूआशा/साक्री कुल लम्बाई:- 495 कि.मी. राजस्थान में लम्बाई:- 330 कि.मी. पश्चिम राजस्थान की गंगा, रेगिस्तान की गंगा, आधी मीठी आधी खारी बहाव:- अजमेर, नागौर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर पश्चिम राजस्थान की सबसे लम्बी नदी है। पश्चिम राजस्थान की एकमात्र नदी लूनी नदी का उद्गम अजमेर जिले के नाग की पहाडियों से होता है। आरम्भ में इस नदी को सागरमति या सरस्वती कहते है। यह नदी अजमेर से नागौर, जोधपुर, पाली, बाडमेर, जालौर जिलों से होकर बहती हुई गुजरात के कच्छ जिले में प्रवेश करती है और कच्छ के रण में विलुप्त हो जाती है। इस नदी की कुल लम्बाई 495 कि.मी. है। राजस्थान में इसकी कुल लम्बाई 330 कि.मी. है। राजस्थान में लूनी का प्रवाह गौड़वाड़ क्षेत्र को गौड़वाड प्रदेश कहा जाता है। लूनी की सहायक नदियों में बंकडा, सूकली, मीठडी, जवाई, सागी, लीलडी पूर्व की ओर से ओर एकमात्र नदी जोजड़ी पश्चिम से जोधपुर से आकर मिलती है। यह नदी बालोतरा (बाड़मेर) के पश्चात् खारी हो जाती है क्योंकि रेगिस्तान क्षेत्र से गुजरने पर रेत में सम्मिलित नमक के...

राजस्थान की नदियां

  राजस्थान की नदियां राजस्थान का अधिकांश भाग रेगिस्तानी है अतः वहां नदीयों का विशेष महत्व है। पश्चिम भाग में सिचाई के साधनों का अभाव है परिणाम स्वरूप यहां नदीयों का महत्व ओर भी बढ़ जाता है। प्राचीन समय से ही नदियों का विशेष महत्व रहा |राजस्थान में महान जलविभाजक रेखा का कार्य अरावली पर्वत माला द्वारा किया जाता है। अरावली पर्वत के पूर्व न पश्चिम में नदियों का प्रवाह है और उनका उद्गम "अरावली" पर्वत माला है। 1.चम्बल नदी(चर्मण्वती,नित्यवाही,सदानिरा,कामधेनू) राजस्थान की सबसे अधिक लम्बी नदी चम्बल नदी का उद्गम मध्य-प्रदेश में महु जिले में स्थित जानापाव की पहाडि़यों से होता है। यह नदी दक्षिण से उत्तर की ओर बहती हुई राजस्थान के चितौड़गढ़ जिले मे चैरासीगढ़ नामक स्थान पर प्रवेश करती है और कोटा व बंूदी जिलों में होकर बहती हुई सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, जिलों में राजस्थान व मध्य-प्रदेश के मध्य सीमा बनाती है। यह नदी मध्यप्रदेश के 4 जिलों महु, मंन्दसौर, उज्जैन और रतलाम से होकर बहती है। राजस्थान की एकमात्र नदी जो अ्रन्तर्राज्यीय सीमा का निर्माण करती है- चम्बल नदी है। अन्त में उत्तर-प्रदेश क...

राजस्थान की झीले

  राजस्थान की झीले राजस्थान में प्राचीन काल से ही लोग जल स्रोतों के निर्माण को प्राथमिकता देते थे। इस कार्य से संबंधित शब्दों पर एक नजर। मीरली या मीरवी- तालाब, बावड़ी, कुण्ड आदि के लिए उपयुक्त स्थान का चुनाव करने वाला व्यक्ति। कीणिया- कुआँ खोदने वाला उत्कीर्णक व्यक्ति। चेजारा- चुनाई करने वाला व्यक्ति। राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर। भारत की झीलों की नगरी श्रीनगर। खारे पानी की झीले मीठे पानी की झीलें सांभर- जयपुर जयसमंद- उदयपुर पचभदरा- बाड़मेर राजसमंद- राजसमंद डीडवाना- नागौर बालसमंद- जोधपुर लुणकरणसर- बीकानेर आनासागर- अजमेर फलौदी- जोधपुर फतेहसागर- उदयपुर कावोद- जैसलमेर फायसागर- अजमेर रेवासा- सीकर उदयसागर- उदयपुर तालछापर- चुरू पुष्कर- अजमेर कुचामन- नागौर कोलायत- बीकानेर डेगाना- नागौर नक्की- सिरोही पौकरण- जैसलमेर सिलिसेढ- अलवर बाप- जोधपुर पिछौला- उदयपुर कोछोर - सीकर कायलाना- जोधपुर नावां - नागौर पीथनपुरी - सीकर राजस्थान की मीठे पानी की प्रमुख झीलें जयसमंद झील /ढेबर झील (उदयपुर) राजस्थान में मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील जयसमंद है। इस झील का निर्माण  मेवाड़  के राणा जयसि...

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक नाम

  राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक नाम भोराठ/भोराट का पठार:-  उदयपुर के कुम्भलगढ व गोगुन्दा के मध्य का पठारी भाग। लासडि़या का पठारः-  उदयपुर में जयसमंद से आगे कटा-फटा पठारी भाग। गिरवाः-  उदयपुर में चारों ओर पहाडि़यों होने के कारण उदयपुर की आकृति एकतश्तरीनुमा बेसिन जैसी है जिसे स्थानीय भाषा में गिरवा कहते है। देशहरोः-  उदयपुर में जरगा(उदयपुर) व रागाा(सिरोही) पहाड़ीयों के बीच का क्षेत्रसदा हरा भरा रहने के कारण देशहरो कहलाता है। मगराः - उदयपुर का उत्तरी पश्चिमी पर्वतीय भाग मगरा कहलाता है। ऊपरमालः-  चित्तौड़गढ़ के भैसरोड़गढ़ से लेकर भीलवाडा के बिजोलिया तक कापठारी भाग ऊपरमाल कहलाता है। नाकोडा पर्वत/छप्पन की पहाडि़याँः-  बाडमेर के सिवाणा ग्रेनाइट पर्वतीय क्षेत्र में स्थित गोलाकार पहाड़ीयों का समुह नाकोड़ा पर्वत। छप्पन की पहाड़ीयाँ कहलाती है। छप्पन का मैदानः-  बासवाडा व प्रतापगढ़ के मघ्य का भू-भाग छप्पन का मैदान कहलाता है। यह मैदान माही नदी बनाती है।(56 गावों का समुह या 56 नालों का समुह) राठः-  अलवर व भरतपुर का वो क्षेत्र जो हरियाणा की सीमा ...